हाल में भारतीय प्रधान मंत्री का अमरीका-दौरा भारतीय कूटनीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण और सराहनीय रहा है। इसमें अब कोई संदेह नहीं की प्रधान मंत्री भारतीय कूटनीति को नए आयाम दे रहें हैं। राजकीय एवं व्यापर-जगत के लोग भारत की प्रगति को बड़े ही करीब से देखने और समझने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो वर्षो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने राजनयिकों से मिले और जिस गति से राजनयिक और व्यापारिक संधियां हुई हैं, अभूतपूर्व एंव प्रशंसनीय है। विकास के सोपानों को नये आयामों को अंजाम देने के मध्य सरकार को यह समझना होगा कि यदि भारत को सचमुच विश्व के विकास का इंजन बनाना है
E-news
Wednesday, 24 August 2016
भारत बन सकता है विकास गुरु अगर...
हाल में भारतीय प्रधान मंत्री का अमरीका-दौरा भारतीय कूटनीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण और सराहनीय रहा है। इसमें अब कोई संदेह नहीं की प्रधान मंत्री भारतीय कूटनीति को नए आयाम दे रहें हैं। राजकीय एवं व्यापर-जगत के लोग भारत की प्रगति को बड़े ही करीब से देखने और समझने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो वर्षो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जितने राजनयिकों से मिले और जिस गति से राजनयिक और व्यापारिक संधियां हुई हैं, अभूतपूर्व एंव प्रशंसनीय है। विकास के सोपानों को नये आयामों को अंजाम देने के मध्य सरकार को यह समझना होगा कि यदि भारत को सचमुच विश्व के विकास का इंजन बनाना है
राहुल ने ली चुटकी, पूछा - क्या दलितों और पिछड़ों को राष्ट्रवादी नहीं मानते हैं पीएम मोदी?
नई दिल्ली : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर उनकी इस कथित टिप्पणी के लिए तंज कसा कि भाजपा को दलितों को अपने साथ जोड़ने की जरूरत है क्योंकि राष्ट्रवादी तो पहले से ही पार्टी के साथ हैं। राहुल ने हैरानी से सवाल किया कि क्या वह (पीएम मोदी) दलितों और पिछड़ों को राष्ट्रवादी नहीं मानते |
राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘मोदीजी अब क्या दलित और पिछड़े राष्ट्रवादी नहीं हैं?’ कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भाजपा कोर समूह की बैठक में कल प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया जता रहे थे जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि भाजपा की राष्ट्रवादी पहचान को कमजोर किये बिना पार्टी को दलितों और पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने की जरूरत है।
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Tuesday, 23 August 2016
JNU में गूंजा राष्ट्रगान, छात्र रहे नदारद
यूजीसी के आदेशों के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भी मंगलवार सुबह 11:00 बजे राष्ट्रगान का आयोजन किया गया. इस दौरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और कर्मचारी मौजूद रहे, जबकि छात्रों की उपस्थिति ना के बराबर रही.
वाइस चांसलर ने किया नेतृत्व
इस पूरे आयोजन का नेतृत्व जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने किया. उनके साथ विश्वविद्यालय से जुड़े प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी के कर्मचारी मौजूद रहे. पूरा आयोजन प्रशासन कार्यालय पर किया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इस पूरे आयोजन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई.
इस पूरे आयोजन का नेतृत्व जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर ने किया. उनके साथ विश्वविद्यालय से जुड़े प्रोफेसर और यूनिवर्सिटी के कर्मचारी मौजूद रहे. पूरा आयोजन प्रशासन कार्यालय पर किया गया. विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से इस पूरे आयोजन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई.
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बलूचिस्तान के मुद्दे पर तिलमिलाया PAK, पंजाब प्रांत की असेंबली में PM मोदी के खिलाफ प्रस्ताव पारित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त को बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान पर दिए बयान से पाकिस्तान इस तरह खफा है कि उसकी पंजाब प्रांत की असेंबली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया है
यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया है, जिसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बलूचिस्तान और गिलगित-बाल्टिस्तान पर दिए उनके बयानों की यह सदन कड़े शब्दों में निंदा करता है और ये भी कहां गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस ढंग से यह बयान दिए हैं, वह सीधा-सीधा पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना है..
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Monday, 22 August 2016
चीन को टक्कर: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना भारत
चीन को टक्कर: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना भारत
चीन को टक्कर: दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बना भारत
नया उद्यम खड़ा करने में दिल्ली-एनसीआर ने मुंबई को पीछे छोड़ दिया है। एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी और इसके आस-पास के क्षेत्र में 23 फीसदी स्टार्टअप शुरू हुए हैं। मुंबई में यह आंकड़ा 17 प्रतिशत है। केंद्र की मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी योजनाओं से इसे बढ़ावा मिला है।
भारत तीसरे नंबर पर : रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन गया है। तकनीक आधारित स्टार्टअप्स के मामले में भारत अमेरिका और ब्रिटेन के बाद तीसरे नंबर पर है। कुल स्टार्टअप कंपनियों के मामले में भी भारत शीर्ष-5 देशों में शामिल है।
निवेश और चुनौतियां : एसोचैम के मुताबिक वर्ष 2014 में 179 स्टार्टअप्स में कुल 14,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ वहीं 2015 में 400 स्टार्टअप्स में 32 हजार करोड़ रुपये का निवेश आया। भारत में स्टार्टअप्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुनाफा कमाना और लंबे समय तक सुचारू रूप से बिजनेस चलाना है। साथ ही कॉर्पोरेट टैक्स और ऋण पर ब्याज की दर भी अधिक है। इससे मुश्किलें आती हैं। हालांकि पांच वर्ष तक स्टार्टअप्स को कर में छूट दी गई है।
चीन से बराबरी : देश में सभी सेक्टर के कुल स्टार्टअप की संख्या 10 हजार है, जबकि पड़ोसी देश चीन में इतने ही स्टार्टअप हैं। वहीं, अमेरिका इस मामले में 83 हजार स्टार्टअप के साथ पहले नंबर पर है।
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